झब्बार चच्चा तुसी ग्रेट हो
झब्बार चाचा की चाची के साथ की गई मेहनत से ऊपर वाला खासा प्रसन्न था। इसलिए उन्हें चार नेमते दीं। झब्बार चच्चा ने इन्ही नेमतों में से एक को देश की सेवा में लगा दिया। उनका बेटा दुबई गया और वहां से आईएसआई की सरपरस्ती में देश सेवा के गुर सिखने लगा। उसे लगा कि देश में रोजाना अब्बा की तरह हजारों, लाखों की संख्या में नेमते आती हैं। इसलिए इनमें कमी लाकर देश की सेवा की जा सकती है। सो वह इस काम में लग गया। झब्बार चच्चा को भी इसका इल्म था। लेकिन वह कुछ कहते नहीं थे, कहा भी होगा तो मीडिया ने नहीं छापा और हमने नहीं सुना।
चच्चा इससे खासे नाराज थे। उनकी नाराजगी सरकार से भी थी। उनका कहना था कि उन्होंने अपने नेमतों में से एक को देश की सेवा के लिए दान दे दिया। बदले में सरकार ने क्या दिया। उस देश सेवा में लगाए नेमत जो अब फरिश्ता बन चुका था से मिलाने के लिए सरकार कभी पांच लाख, कभी दस लाख रुपये देने की घोषणा कर देती। पूरा जोड़ने पर एक करोड़ नहीं होता, इतना तो उनका नेमत विदेश से ही भेज देता है।
चच्चा का कहना है कि अब उनमें इतनी ताकत नहीं रही कि वह अपने नेमत को देश सेवा के रास्ते से डिगा कर वापस ला दें और उनके शरीर के कुछ अंगों की वह हालत नहीं रही जिसकी मदद से वह ऊपर वाले से एक आध नेमत चुरा लाएं।
खैर देश सेवा के काम में उन्होंने जिस नेमत को लगाया था , वह बखूबी अपना काम कर रहा था। पर झब्बार चच्चा की मानें तो उन्हें वह कुछ भी नहीं बता रहा था। लेकिन उन्हें भरोसा है कि उनकी नेमत गलत नहीं हो सकती है। इसलिए उनकी मांग है कि इस सेवा के लिए उनके बाकी नेमतों को सरकार नौकरी दे। कुछ पैसे दे ताकि वह भी कम से कम एक आध दर्जन और नेमत इस जहां में ला सके और देश सेवा की इस परंपरा को आगे बढ़ा सके।
झब्बार चाचा की चाची के साथ की गई मेहनत से ऊपर वाला खासा प्रसन्न था। इसलिए उन्हें चार नेमते दीं। झब्बार चच्चा ने इन्ही नेमतों में से एक को देश की सेवा में लगा दिया। उनका बेटा दुबई गया और वहां से आईएसआई की सरपरस्ती में देश सेवा के गुर सिखने लगा। उसे लगा कि देश में रोजाना अब्बा की तरह हजारों, लाखों की संख्या में नेमते आती हैं। इसलिए इनमें कमी लाकर देश की सेवा की जा सकती है। सो वह इस काम में लग गया। झब्बार चच्चा को भी इसका इल्म था। लेकिन वह कुछ कहते नहीं थे, कहा भी होगा तो मीडिया ने नहीं छापा और हमने नहीं सुना।
चच्चा इससे खासे नाराज थे। उनकी नाराजगी सरकार से भी थी। उनका कहना था कि उन्होंने अपने नेमतों में से एक को देश की सेवा के लिए दान दे दिया। बदले में सरकार ने क्या दिया। उस देश सेवा में लगाए नेमत जो अब फरिश्ता बन चुका था से मिलाने के लिए सरकार कभी पांच लाख, कभी दस लाख रुपये देने की घोषणा कर देती। पूरा जोड़ने पर एक करोड़ नहीं होता, इतना तो उनका नेमत विदेश से ही भेज देता है।
चच्चा का कहना है कि अब उनमें इतनी ताकत नहीं रही कि वह अपने नेमत को देश सेवा के रास्ते से डिगा कर वापस ला दें और उनके शरीर के कुछ अंगों की वह हालत नहीं रही जिसकी मदद से वह ऊपर वाले से एक आध नेमत चुरा लाएं।
खैर देश सेवा के काम में उन्होंने जिस नेमत को लगाया था , वह बखूबी अपना काम कर रहा था। पर झब्बार चच्चा की मानें तो उन्हें वह कुछ भी नहीं बता रहा था। लेकिन उन्हें भरोसा है कि उनकी नेमत गलत नहीं हो सकती है। इसलिए उनकी मांग है कि इस सेवा के लिए उनके बाकी नेमतों को सरकार नौकरी दे। कुछ पैसे दे ताकि वह भी कम से कम एक आध दर्जन और नेमत इस जहां में ला सके और देश सेवा की इस परंपरा को आगे बढ़ा सके।