शनिवार, 12 दिसंबर 2009

छोटे राज्य क्या समस्या का हल है

जिस जगह से चले थे हम , बरसो बाद फ़िर वही खड़े है , तिनका जोड़ा था तो सोचा घरौंदा बन गया , पर क्या मल्लों था यह फिर बिखर जयेगा , घर फिर एक बार तिनको में बदल जाएगा।
अगर सरदार पटेल जिन्दा रहते तो वर्तमान स्थिति पर यही शेर गुन गुना रहते। बात तेलंगाना पर उठे बवाल पर है । अगर विकास के नाम पर छोटे राज्यों की मांग होती रही और ऐसे ही दबाव में सरकार मानती रही तो देश फिर ६०० राज्यों में बाँट जयेगा । भारत विविधता का देश है यहाँ हर जिले हर ब्लाक में एक अलग संस्कृति पनपती है और इसी को अधर बनाकर राज्य बन ने लगे तो केवल उत्तर पूर्व में ही ६० से ज्यादा आदिवासी समूह हैकितनो की मह्त्कंसा को पुरा करेंगे ।

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