बुधवार, 11 नवंबर 2009

चुनाव क्या लोकतंत्र को मजबूत करता है

हाल ही में कई राज्यों में उपचुनाव का परिणाम आया है निश्चित तौर पर देश में कांग्रेश और उत्टर प्रदेश में बसपा की जीत हुई पर एक बड़ा सवाल मेरे मन में अभी भी दौड़ रहा है की क्या इन चुनावो से लोकतंत्र की जीत हुई है ? ऐसे अभी तक हजारो चुनाव हुए है पर लाख टका का सवाल है की इन चुनावो से आम जनता के जीवन स्तर पर कोई प्रभाव पड़ेगा ? शयेद नही हाँ नेताओ की सेहत पर जरूर प्रभाव पड़ेगा । सत्ता की लालीपॉप खाने वालो की ऐश हो जायेगी और बिपक्ष वाले भी सियार की तरह सत्ता पक्ष के भ्रस्ताचार रुपी मांश से कुछ हिशा तो लेने में सफल हो ही जायेंगे। देश में जनता मूल सुबिधाओ के लिए तड़प रही है वोही तथाकथित जनसेवक विदेश यात्रा के लिए लाइन लगा कर खड़े है की कब उनकी बारी आयेगी । लेकिन यह सब होता है आम जनता के नाम पर । यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है की एक तरफ़ वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट जारी करता है की ७० प्रतिशत से ज्यादा आबादी प्रतिदिन २० रुपया से भी कम जीवनयापन करती है वोही हमारे नेता प्रतिवर्ष मालामाल होते जा रहे है । यह बिरोधाभास क्यों ? उपरोक्त तथ्य हमे अपना अक्ष दिखाने के लिए काफी है , पर हम भी ठहरे २००० सालो के गुलाम हमारे रक्त में गुलामी जो आ गयी है यही कारन है की हम सब देख कर भी ध्रित्रस्त्र की तरह अपनी आंखे बंद कर लेते है और इतना ही नही राज ठाकरे जैसे नेताओ के पिच्लागू बन कर सदन में जीता भी देते है । तर्क देते है की वोह हमारी मात्र bhasa को सम्मान दिलाएगा , अगर यह सही होता तो bhala ठाकरे अपने bacho को municipal के सरकारी school में क्यो न bhej कर convent में bhejte है । कुछ इसी तरह का तर्क kashmir में algawwadio ने दिया था पर ख़ुद उनके बचे london और delhi के schoolo में पढ़ते है और murkh जनता लाल चौक पर swaeta के नाम पर खून की holi khelti थी । आज भी khelti है । इतना kahne का बस इतना makshad है की जनता नेताओ को न jitakar लोकतंत्र को jitaye और यह तभी सम्भव होगा जब जनता mayawati को दलित की बेटी और sonia को इंदिरा की बहु mankar vote देने के bajaye उनके kamo के adhar पर barabr में खड़ा हो कर hisab mangne के बाद vote देगा।

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