अरमान से एक -एक तिनका जोड़ा ,हिरदय के कोटर में महल को समेटा ,
सोचा था की मै रहूँगा ,खुशियो को मै सहूँगा,

तभी एक तूफ़ान आया ,मन फूटा ,घर टूटा,
सायद यह जग छूटा ,एक द्य्त्य ने घर पर हमला किया
घर की मालकिन हुई घयेल , घायल हो कर भी मुझे संभाला ,
पर बिधाता को यह भी देखा न गया ,उसे भी छीन लिया,
घटना हुई सात साल पुरानी, पर लगती कल की ,
भला नीद का टूटना ,स्वप्न महल का छूटना भी भूलता है,
बस यद् करता , पर होता है आँखों के कगार बस टूट जाते है,
जब नीद टूट जाते है ,स्वप्न महल छूट जाते है ।
सुनहरा नीड़ टूट जाता है, आह बस रह जाता है,
और रह जाती है सिर्फ़ आंसू ।
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